Saturday, June 20, 2009

संसार का सच:


आज मन बहुत उदास है,
दिल में आंसू का सैलाब है
जो लगता था हमारा,
वो ही आज हमसे खफा है


क्यूँ आती है खुशियाँ इतनी,
जब मिलते है दुख इतने
हस्त रेखा कभी नहीं देती है साथ,
क्योंकि है ही नहीं मेरे हाथ


अपाहिज हूँ रस्ते में खडा हूँ,
दे दो कोई मुझे हाथ, करवा दो इस दुनियाँ से आजाद
एक तरफ लोगो की आशाएं होती है,
तो एक तरफ उन्ही की दुहाई होती है


कहते है जुल्म है जीना तुम्हारे लिए,
अधूरे से अच्छा है पूरे मरे


क्या जीवन है इस संसार में,
इंसान है या जानवर है,
जानवर तब भी साथ निभाए,
पर यहाँ तो इन्सान है,
कर
दो आजाद इस जीवन से

2 comments:

  1. हिंदी भाषा को इन्टरनेट जगत मे लोकप्रिय करने के लिए आपका साधुवाद |

    ReplyDelete